Table of content:
1. कवि श्रीकांत वर्मा का जीवन परिचय 
2. हस्तक्षेप कविता का सारांश
3. हस्तक्षेप कविता
4. हस्तक्षेप कविता की व्याख्या
5. हस्तक्षेप कविता प्रश्न अभ्यास 
6. क्लास 11 अंतरा भाग 1 सभी कविताएं

Class 11 Hindi Chapter 18 Hastakshep Poem Summary in Hindi

हस्तक्षेप कविता क्लास 11 अंतरा पाठ 18 – श्रीकांत वर्मा

कवि श्रीकांत वर्मा का जीवन परिचय-
कवि श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 दिसंबर 1931 को बिलासपुर मध्य प्रदेश में हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा बिलासपुर में ही हुई। सन् 1956 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. करने के बाद, उन्होंने एक पत्रकार के रूप में अपना सहित्यिक जीवन शुरू किया।

इन्हें निम्नलिखित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:-
=>तुलसी पुरस्कार
=>आचार्य नंद दुलारे वाजपेयी पुरस्कार
=>शिखर सम्मान
=>कुमारन आशान पुरस्कार

इनकी प्रमुख रचनाएं हैं – जलसाघर, मगध, भटका मेघ, माया-दर्पण, झाड़ी संवाद, घर, दूसरे के पैर, जिरह, अपोलो का रथ, फैसले का दिन, बीसवीं शताब्दी के अंधेरे में।

इनकी काव्यगत विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-
=>श्रीकांत वर्मा जी को कम शब्दों में अधिक कहने में महारथ हासिल है।
=>उन्होंने आधुनिक जीवन के यथार्थ का नाटकीय चित्र प्रस्तुत किया है।
=>भाषा आम बोलचाल वाली, सरल व सरस है।
=>तत्सम-तद्भव शब्दों का प्रयोग किया है।

हस्तक्षेप कविता का सारांश – Hastakshep Poem Summary

इस कविता में कवि ने मगध की सत्ता की निरंकुशता एवं क्रूरता का वर्णन करते हुए दर्शाया है कि वहां ऐसा आतंकपूर्ण वातावरण हो गया है, जिससे लोग भयभीत और भौंचक्के हो गए हैं। कवि सत्ताधारी वर्ग पर अप्रत्यक्ष रूप से व्यंग करते हुए कहते हैं, मगध के लोग यह सोचते हैं कि मगध में शांति रहनी ही चाहिए। शांति भंग होने के डर से कोई छींक तक नहीं मार रहा है। मगध के अस्तित्व के लिए शांति का होना अत्यंत आवश्यक है।

निरंकुश शासन व्यवस्था में लोगों पर कितना ही अत्याचार क्यों न हो जाए, कोई चीख-पुकार नहीं कर सकता। ऐसा करना शासन के विरुद्ध समझा जाएगा। शासन व्यवस्था में व्यवधान हो जाएगा। मगध सिर्फ नाम का मगध है, रहने के लिए मगध नहीं है।

कवि कहता है कि तुम विरोध से कितना ही बचो, परन्तु तुम उसके स्पष्ट विरोध से बच नहीं पाओगे। जब कोई विरोध नहीं करता, तो शहर के बीच से गुज़रता मुर्दा यह प्रश्न करता है कि मनुष्य क्यों मरता है अर्थात् अत्याचार बढ़ने पर दबा-कुचला वर्ग भी निरंकुश सत्ता पर उंगली उठा सकता है।

कुल-मिलाकर कवि ने हस्तक्षेप कविता में आम व्यक्ति को गलत निर्णयों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया है। कवि आम जनता का आह्वान करते हुए कहते हैं कि सत्ता के गलत निर्णयों के विरुद्ध विद्रोह करते हुए डरना नहीं चाहिए।

व्यवस्था को जनतांत्रिक बनाने के लिए समय-समय पर उसमें हस्तक्षेप की जरूरत होती है, वरना व्यवस्था निरंकुश हो जाती है। इस कविता में ऐसे ही तंत्र का वर्णन है, जहां किसी भी प्रकार के विरोध के लिए गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। कवि बताता है कि हस्तक्षेप तो मुर्दा भी कर जाता है। फिर जिंदा लोग चुप बैठे रह जाएंगे, यह कैसे संभव है।

हस्तक्षेप कविता – Hastakshep Poem

कोई छींकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की शांति
भंग न हो जाय,
मगध को बनाए रखना है, तो,
मगध में शांति
रहनी ही चाहिए

मगध है, तो शांति है

कोई चीखता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की व्यवस्था में
दखल न पड़ जाय
मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए

मगध में न रही
तो कहाँ रहेगी?
क्या कहेंगे लोग?
लोगों का क्या?
लोग तो यह भी कहते हैं
मगध अब कहने को मगध है,

रहने को नहीं

कोई टोकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध में
टोकने का रिवाज न बन जाय

एक बार शुरू होने पर
कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप –

वैसे तो मगधनिवासियो
कितना भी कतराओ
तुम बच नहीं सकते हस्तक्षेप से –

जब कोई नहीं करता
तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ
मुर्दा
यह प्रश्न कर हस्तक्षेप करता है –
मनुष्य क्यों मरता है?

हस्तक्षेप कविता की व्याख्या – Hastakshep Poem Line by Line Explanation

कोई छींकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की शांति
भंग न हो जाय,
मगध को बनाए रखना है, तो,
मगध में शांति
रहनी ही चाहिए

मगध है, तो शांति है

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ- प्रस्तुत काव्य पंक्तियां श्रीकांत वर्मा द्वारा रचित हैं। इस कविता में कवि ने मगध की शासन व्यवस्था पर प्रहार किया है। कवि कहते हैं कि मगध की शासन व्यवस्था लोगों के साथ अन्याय करती है। लोगों में इतनी व्याकुलता है, जिसे देखकर लगता है कि मगध की शांति के लिए अब आवाज उठानी ही चाहिए। प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में कवि ने छींक शब्द का प्रयोग किया है।

यहां पर छींकने का तात्पर्य शासन व्यवस्था की ओर एक व्यंग्य है कि गलत पर गलत हुआ जा रहा है, मगर कोई विरोध करने वाला नहीं है। यदि शासन में शांति लाने की व्यवस्था है, तो ही मगध है। अगर इसका विद्रोह किया जाएगा, तो मगध का अस्तित्व नष्ट हो जाएगा। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति मगध के शासन के खिलाफ आवाज़ उठाता है, तो उस पर दबाव डाल दिया जाता है।

कोई भी व्यक्ति मगध के शासन के विरुद्ध आवाज ना उठाए, क्योंकि मगध के लोगों को पता है कि अगर जनता आवाज उठाएगी, विरोध करेगी, तो वह एक अशांति को जन्म देगा। अब तक जो भी राजनीति या मनमानी, वे करते हुए आ रहे थे विद्रोह करने से वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। अतः मगध में शांति ना आए, इसका प्रयास सत्ता के लोग हमेशा करते रहते हैं।

कोई चीखता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की व्यवस्था में
दखल न पड़ जाय
मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ-इन काव्य पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि मगध अब सिर्फ नाम के लिए मगध है। यहां पर इतनी क्रूरता है कि यहां पर रहना अब मुश्किल-सा हो गया है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने न सिर्फ मगध की शासन व्यवस्था का विरोध किया है, बल्कि वहां की शासन व्यवस्था के अंतर्गत लोगों के मन में जो डर पैदा हुआ है, यहां पर उन्होंने उसका भी चित्र प्रस्तुत किया है।

मगध में न रही
तो कहाँ रहेगी?
क्या कहेंगे लोग?
लोगों का क्या?
लोग तो यह भी कहते हैं
मगध अब कहने को मगध है,

रहने को नहीं

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ- मगध साम्राज्य की बदनामी न हो, इसलिए यहां का साम्राज्य लोगों पर दबाव डालता है कि वे इस साम्राज्य की मर्यादा को बनाए रखें अर्थात अन्याय के खिलाफ को बिल्कुल भी आवाज़ न उठाएं। अगर वे अपनी चुप्पी तोड़ेंगे और इस मगध साम्राज्य के विषय में लोगों के सामने आवाज उठाएंगे, तो यहां की शासन व्यवस्था नष्ट हो सकती है। इससे यहां रहने वाले मगधवासियों पर बुरा असर पड़ सकता है।

कोई टोकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध में
टोकने का रिवाज न बन जाय

एक बार शुरू होने पर
कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप –

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ- कवि के अनुसार मगध के शासन तंत्र की अनुचित बातों पर कोई हस्तक्षेप नहीं करता क्योंकि ऐसा करने से वहां सत्ता का विरोध करने की परंपरा आरंभ हो जाएगी।

वैसे तो मगधनिवासियो
कितना भी कतराओ
तुम बच नहीं सकते हस्तक्षेप से –

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ- प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में कवि श्रीकांत वर्मा जी कहते हैं कि यहां के लोग अर्थात मगध के लोग बड़े ही अजीब है। यहां पर वे गलत को स्वीकार करते हैं, लेकिन अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ वह हस्तक्षेप यानी कि कोई विरोध नहीं करते और चुपचाप अन्याय को सहन रहे हैं।

जब कोई नहीं करता
तब नगर के बीच से गुजरता हुआ
मुर्दा
यह प्रश्न कर हस्तक्षेप करता है –
मनुष्य क्यों मरता है?

हस्तक्षेप कविता का भावार्थ-  मगध में रहने वाले सब लोग यह जानते हैं कि अगर वे विरोध करेंगे, तो अन्याय से मुक्त हो सकते हैं। इससे, बाकी लोगों को भी मुक्ति मिल सकती है। मगर वे डर से ऐसा नहीं कर रहे हैं। कवि ने यहाँ मुर्दों से, समाज में दबे-कुचले वर्ग की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि अत्याचार बढ़ने पर ऐसे लोग भी क्रांति कर सकते हैं। 

क्लास 11 अंतरा भाग 1- Class 11 Hindi Antra Part 1 All Chapter

10. कबीर के पद- कबीर
11. सूरदास के पद- सूरदास
12. हँसी की चोट – देव
13. औरै भाँति- पद्माकर
14. संध्या के बाद- सुमरित्रानन्दन पंत
15. जाग तुझको दूर- महादेवी वर्मा
15. सब आँखों के आँसू उजले
16. नींद उचट जाती है- नरेंद्र शर्मा
17. बादल को घिरते देखा है- नागार्जुन
18. हस्तक्षेप- श्रीकांत वर्मा
19. घर में वापसी- धूमिल

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