Table of content:
1. कवि पद्माकर का जीवन परिचय
2. पद्माकर कवित्त का सारांश

3. औरै भाँति कुंजन में गुंजरत कवित्त का भावार्थ 
4. गोकुल के कुल के गली के गोप कवित्त का भावार्थ
5. भौंरन को गुंजन बिहार कवित्त का भावार्थ
6. पद्माकर कवित्त प्रश्न अभ्यास 

7. क्लास 11 अंतरा भाग 1 सभी कविताएं

Padmakar Class 11 Hindi Antra Chapter 13 Summary

Padmakar ka jeevan parichay – पद्माकर का जीवन परिचय
👉 श्री पद्माकर का जन्म 1733 में सागर में हुआ था लेकिन कुछ इतिहासकार इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बताते है। इनके पिता श्री मोहन लाल भट्ट थे। इनके पिता व अन्य वशंज कवि थे इसलिए इनके वंश का नाम कविश्वर पड़ा। बूंदी नरेश, पन्ना के राजा जयपुर से इन्हें विशेष सम्मान मिला। इनका निधन सन् 1833 में हुआ।

पद्माकर की रचनाएं:-
पदमाभरण, रामरसायन, गंगा लहरी, हिम्मत बहादुर, विरुदावली, प्रताप सिंह विरुदावली, प्रबोध पचासा इनकी कुछ प्रमुख रचनाएं हैं। कवि राज शिरोमणि की उपाधि से इन्हें सम्मानित किया गया।

पद्माकर की काव्यगत विशेषताएं:-
👉 पद्माकर ने अपना काव्य ब्रजभाषा में रचा है जिसमें अलंकारों की विविधता है। अनुप्रास अलंकार, यमक, श्लेष, उपमा, उत्प्रेक्षा इनके प्रिय अलंकार हैं। भाषा भावानुकूल और शब्द चयन विष्यनुकूल है। भाषा में प्रवाह और गति है। मुहावरे और लोकोक्तियों का सुंदर प्रयोग किया है। सवैया और कवित्त छंद का सुंदर प्रयोग किया है।

पद्माकर रीतिकालीन कवि है। अपनी अधिकतर रचनाओं में प्रेम और सौंदर्य का सजीव चित्रण किया है।

Padmakar class 11 summary in Hindi
👉 पहले कवित्त में कवि ने प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया है। प्रकृति का संबंध विभिन्न ऋतुओं से है। वसंत ऋतुओं का राजा है। वसंत के आगमन पर प्रकृति, विहग और मनुष्यों की दुनिया में जो सौंदर्य संबंधी परिवर्तन आते हैं, कवि ने इसमें उसी को लक्षित किया है।

👉 दूसरे कवित्त में गोपियाँ लोक-निंदा और सखी-समाज की कोई परवाह किए बिना कृष्ण के प्रेम में डूबे रहना चाहती हैं।

👉 अंतिम कवित्त में कवि ने वर्षा ऋतु के सौंदर्य को भौंरों के गुंजार, मोरों के शोर और सावन के झूलों में देखा है। मेघ के बरसने में कवि नेह को बरसते देखता है।

पद्माकर के कवित्त 

औरै भाँति कुंजन में गुंजरत
औरै भाँति कुंजन में गुंजरत भीर भौंर,
औरे डौर झौरन पैं बौरन के ह्वै गए।
कहैं पद्माकर सु औरै भाँति गलियानि,
छलिया छबीले छैल औरै छबि छ्वै गए।
औरै भाँति बिहग-समाज में अवाज होति,
ऐसे रितुराज के न आज दिन द्वै गए।
औरै रस औरै रीति औरै राग औरै रंग,
औरै तन औरै मन औरै बन ह्वै गए।।

गोकुल के कुल के गली के गोप
गोकुल के कुल के गली के गोप गाउन के
जौ लगि कछू-को-कछू भाखत भनै नहीं।
कहैं पद्माकर परोस-पिछवारन के,
द्वारन के दौरि गुन-औगुन गनैं नहीं।
तौ लौं चलित चतुर सहेली याहि कौऊ कहूँ,
नीके कै निचौरे ताहि करत मनै नहीं।
हौं तो स्याम-रंग में चुराई चित चोराचोरी,
बोरत तौं बोर्यौ पै निचोरत बनै नहीं।।

भौंरन को गुंजन बिहार
भौंरन को गुंजन बिहार बन कुंजन में,
मंजुल मलारन को गावनो लगत है।
कहैं पद्माकर गुमानहूँ तें मानहुँ तैं,
प्रानहूँ तैं प्यारो मनभावनो लगत है।
मोरन को सोर घनघोर चहुँ ओरन,
हिंडोरन को बृंद छवि छावनो लगत है।
नेह सरसावन में मेह बरसावन में,
सावन में झूलिबो सुहावनो लगत है।।

Padmakar class 11 vyakhya

औरै भाँति कुंजन में गुंजरत भीर भौंर,
औरे डौर झौरन पैं बौरन के ह्वै गए।
कहैं पद्माकर सु औरै भाँति गलियानि,
छलिया छबीले छैल औरै छबि छ्वै गए।
औरै भाँति बिहग-समाज में अवाज होति,
ऐसे रितुराज के न आज दिन द्वै गए।
औरै रस औरै रीति औरै राग औरै रंग,
औरै तन औरै मन औरै बन ह्वै गए।।

Padmakar class 11 explanation: कवि कहता है कि वसंत ऋतु के आते ही लताओं-झांडियो में घूमते विचरते भांरों की गुंजार कुछ और ही प्रकार की हो गई है। आम की मंजरियों के गुच्छों की छटा भी अलग ही प्रकार की हो गई है। कवि का तात्पर्य यह है कि वसंत ऋतु का आगमन होते ही प्रकृति में एक विशेष प्रकार का निखार आ गया है ल। कवि पद्माकर कहते है कि गलियों में घूमने वाले वांके, सजीले और सुंदर नवयुवकों पर अलग प्रकार की ही छवि छा गई है। अर्थात् सुंदर युवकों की छवि और भी आकर्षक प्रतीत हो रही है।

गोकुल के कुल के गली के गोप गाउन के
जौ लगि कछू-को-कछू भाखत भनै नहीं।
कहैं पद्माकर परोस-पिछवारन के,
द्वारन के दौरि गुन-औगुन गनैं नहीं।
तौ लौं चलित चतुर सहेली याहि कौऊ कहूँ,
नीके कै निचौरे ताहि करत मनै नहीं।
हौं तो स्याम-रंग में चुराई चित चोराचोरी,
बोरत तौं बोर्यौ पै निचोरत बनै नहीं।।

Padmakar class 11 explanation: कवि के अनुसार गोकुल क्षेत्र के ग्वालों के सभी गांवों की गली-गली में होली का उल्लास इस तरह से छाया हुआ है कि वहां के हाल के बारे में कुछ भी कहते नहीं बनता। कवि का तात्पर्य यह है कि वहां हर ओर होली की मस्ती छाई हुई है। कवि पद्माकर कहते है कि लोग अपने आस-पड़ोस, पिछवाड़े और द्वार-द्वार तक दौड़ लगते हुए होली खेल रहे है। वे किसी के गुण-अवगुण का भी ध्यान नहीं रखते। कवि होली का वर्णन करते हुए आगे कहता है कि कोई चंचल और चतुर सखी अपनी सखी से कहती है कि वह रंग में भीगे हुए अपने कपड़े को अच्छी तरह से निचोड़ने का प्रयास करती है, लेकिन उसमें निचोड़ते नहीं बनता क्योंकि उसका मन वश में नहीं रहा।

भौंरन को गुंजन बिहार बन कुंजन में,
मंजुल मलारन को गावनो लगत है।
कहैं पद्माकर गुमानहूँ तें मानहुँ तैं,
प्रानहूँ तैं प्यारो मनभावनो लगत है।
मोरन को सोर घनघोर चहुँ ओरन,
हिंडोरन को बृंद छवि छावनो लगत है।
नेह सरसावन में मेह बरसावन में,
सावन में झूलिबो सुहावनो लगत है।।

Padmakar class 11 explanation: कवि के अनुसार सावन में वन और झंडियों  – लताओं के बीच घूमते हुए भौरों का गुंजार करना राग मल्हार में गीत गाने जैसा प्रतीत हो रहा है कवि पद्माकर कहते हैं कि वर्षा के प्रेमपूर्ण वातावरण में मुझे आत्म अभियान, मान-सम्मान अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय अपना प्रियतम लगता है। दूसरा अर्थ यह है कि सावन में प्रेयसी का घमंड से रूठना भी प्राणों से प्यारा और मन को अच्छा लगने वाला लगता है। यहां कवि का तात्पर्य यह है कि वर्षा ऋतु के आनंददायक परिवेश में यदि प्रेयसी घमंड करते हुए रूठ भी जाए तो उसको बुरा नहीं लगता बल्कि अधिक आकर्षक उत्पन्न होता है।

Class 11 Hindi Antra Part 1 All Poem Summary

10. कबीर के पद- कबीर
11. सूरदास के पद- सूरदास
12. हँसी की चोट – देव
13. औरै भाँति- पद्माकर
14. संध्या के बाद- सुमरित्रानन्दन पंत
15. जाग तुझको दूर- महादेवी वर्मा
15. सब आँखों के आँसू उजले
16. नींद उचट जाती है- नरेंद्र शर्मा
17. बादल को घिरते देखा है- नागार्जुन
18. हस्तक्षेप- श्रीकांत वर्मा
19. घर में वापसी- धूमिल

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