तोड़ो कविता का प्रश्न-अभ्यास – Todo Poem Questions and Answers

प्रश्न 1: ‘पत्थर’ और ‘चट्टान’ शब्द किसके प्रतीक हैं?

उत्तर- प्रस्तुत कविता तोड़ो में ‘पत्थर’ और ‘चट्टान’ जीवन में आने वाले बंधनों एवं बाधाओं के प्रतीक हैं। इसलिए कवि इस कविता के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि मनुष्य को अपने जीवन में आने वाली बाधाओं एवं बंधनों को दूर हटाकर जीवन में अपने मंजिल को पाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 2: भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्‍या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो

उत्तर- बीज को पोषण मिट्टी के उपजाऊपन के कारण प्राप्त होता है। मनुष्य का मन मिट्टी के समान ही होता है। यदि उसमें पोषण होगा, तो ही वह कुछ नया सृजन कर पाएगा। कुछ नया सृजन करने के लिए, मनुष्य को अपने मन में व्याप्त खींझ को बाहर निकाल कर रखना होगा।

प्रश्न 3: कविता का आरंभ ‘तोड़ो तोड़ो तोड़ो’ से हुआ है और अंत ‘गोड़ो गोड़ो गोड़ो’ से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया?

उत्तर- ‘तोड़ो तोड़ो तोड़ो’ के माध्यम से कवि ने मनुष्य को विघ्न बाधाओं को तोड़ने के लिए प्रेरित किया है। मनुष्य की खींझ उनके पथ में आने वाली बाधाएं, उनके विचारों को अत्यधिक प्रभावित करती है।

‘गोड़ो गोड़ो गोड़ो’के माध्यम से मनुष्य को अपने मन में कुछ नया गढ़ने की बात कही गई है। 

जिस तरह से भूमि के अंदर व्याप्त चट्टानों और पत्थरों को तोड़कर उसके बंजरपन को जड़ से समाप्त किया जाता है। ठीक उसी प्रकार इन शब्दों के माध्यम से कवि ने मनुष्य को उसके मन पर विशेष बल देने को कहा है। ताकि वह अपने सामने खड़ी कठिनाइयों से लड़ सके और खुद को बलवान शक्तिशाली बना कर कुछ नया विकसित कर सके।

प्रश्न 4: ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती का हम जानें
यहां पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय हैं?

उत्तर- झूठे बंधन मनुष्य को उनके पथ से भ्रष्ट करते हैं। धरती को चट्टान एवं पत्थर बंजर बना देते हैं और मनुष्य को उनके मन में व्याप्त झूठे बंधन बंजर बनाते हैं।

धरती को जानने का तात्पर्य यह है कि धरती में इतनी शक्ति होती है कि वह संपूर्ण संसार का पालन पोषण कर सकती है। पत्थर और चट्टान के कारण धरती बंजर बना जाती है। मनुष्य का प्रकृति से गहरा संबंध है।

मनुष्य और प्रकृति एक जैसे हैं, इसलिए मनुष्य को भी प्रकृति जैसी उपजाऊ बनने के लिए झूठे बंधन को खत्म कर उपजाऊ बनना होगा।

प्रश्न 5. ‘आधे-आधे गाने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर- इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि मनुष्य तब तक उस गाने को पूर्ण नहीं कर सकता जो वह गाना चाहता है। जब तक वह अपने हृदय में व्याप्त खींझ एवं ऊब को बाहर उठाकर नहीं फेंक देता।

जब मनुष्य का मन प्रसन्न होता है, उल्लास से भरा पूरा होता है, तभी वह गाना गा सकता है। जब मन ही उदास होगा, तो मनुष्य गाना कैसे गाएगा।

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