Class 11 Hindi Aroh Chapter 16 Solution – कक्षा 11 हिंदी आरोह पाठ 16 प्रश्न अभ्यास

प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कोलकाता शहर में बजर गिरे?
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती उत्तर: चंपा कोलकाता शहर को अच्छे से जानती है कि यह एक ऐसा शहर है, जहां पर लोगों का शोषण होता है। लोग भले काम कर रहे होते हैं, मगर उनके ऊपर अत्याचार भी होता है। जिस युग की यह कविता है वह युग कुछ खास नहीं था। उस वक्त समाज में शोषण होता था, इसीलिए चंपा अपने पति को कोलकाता नहीं जाने देना चाहती है क्योंकि वह चाहती है कि उसका पति उसके साथ रहे, उसके पास रहे और वह अपने पति का अच्छे से ख्याल रख सके।

दूसरी बात जब कवि ने उससे यह कहा कि तुम पढ़ना-लिखना शुरू कर दो वरना शादी के बाद अगर तुम्हारा पति दूर चला जाएगा, तो तुम उस से वार्तालाप नहीं कर पाओगी तो यह भी हो सकता है, जिस वजह से वह कहती है कि उस शहर पर वज्र गिरे जो एक इंसान को एक परिवार से अलग कर देगा। बस यही कारण है कि उसने यहां पर वज्र गिरने की बात कही।

प्रश्न 2: इस बात पर चंपा को क्यों विश्वास नहीं होता है कि गांधी बाबा ने पढ़ने लिखने को कहा है?
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती उत्तर: चंपा के सामने कवि ने गांधीजी की बहुत बातें की है। चंपा के अनुसार गांधी बाबा एक बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं। मगर उसे यह नहीं पता था कि गांधी जी ने पढ़ने-लिखने की बात कही है।

जब उसे यह बात पता चली कि गांधी बाबा यही चाहते थे कि दुनिया का हर व्यक्ति पढ़ाई-लिखाई करे, तब चंपा को यह बात हजम नहीं हुई और इस कारण से वह इस बात पर विश्वास नहीं कर पाई।

प्रश्न 3: कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती उत्तर: कवि ने चंपा की जिन विशेषताओं का उल्लेख किया है वह विशेषताएँ कुछ इस प्रकार है-

  • चंपा एक बहुत ही नटखट एवं शरारती लड़की है।
  • चंपा महात्मा गांधी जी को बेहद सम्मान पूर्वक देखती थी।
  • चंपा एक ग्रामीण वातावरण में ढली लड़की थी।
  • चंपा को पढ़ने लिखने नहीं आता था।
  • चंपा के मन में किसी भी बात को जानने की उत्सुकता रहती थी।

प्रश्न 4: आपके विचार में चंपा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मैं तो नहीं पढूंगी?
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती उत्तर: जैसा कि कविता से पता ही चलता है कि चंपा एक ग्रामीण समाज में बड़ी हो रही है और समाज का असर व्यक्ति के ऊपर अवश्य पड़ता है। आमतौर पर ग्रामीण समाज के लोग पढ़ने-लिखने को उतना गुरुत्व नहीं देते थे और यही कारण है कि शायद चंपा भी पढ़ाई-लिखाई को उतना गुरुत्व नहीं देती है।

गांव के लोग अक्सर यही सोचते हैं कि पढ़ने-लिखने वाले लोग अच्छे नहीं होते हैं। जिस कारण चंपा के मन में भी यही विचार उत्पन्न होता है कि पढ़ने लिखने वाले लोग अच्छे नहीं होते हैं और इसी वजह से वह कहती है कि मैं नहीं पढूंगी।

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चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती
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