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Table of Content:
1. कवि अज्ञेय का जीवन परिचय
2. मैंने देखा एक बूँद कविता का सारांश
3. मैंने देखा एक बूँद कविता
4. मैंने देखा एक बूँद कविता की व्याख्या
5. मैंने देखा एक बूँद प्रश्न अभ्यास
6. कठिन शब्द और उनके अर्थ
7. Class 12 Hindi Antra All Chapter

कवि अज्ञेय का जीवन परिचय – Kavi Agyey Ka Jeevan Parichay

कवि अज्ञेय का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन है। कवि अज्ञेय का जन्म कुशीनगर उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेजी एवं संस्कृत दोनों ही भाषा में हुई थी। कवि निराला की तरह कवि अज्ञेय ने भी हिंदी बाद में सीखी थी।

शिक्षा- कवि अज्ञेय के संपर्क में कहा जाता है कि इन्होंने बीएससी समाप्त करने के बाद एम.ए. अंग्रेजी में प्रवेश लिया था।

कुछ क्रांतिकारी आंदोलन के कारण उनकी एम.ए. की पढ़ाई मध्य में छूट गई। इन्होंने विदेशों में भी बहुत बार भ्रमण किया था।

रचनाएं- कवि अज्ञेय प्रकृति के प्रेमी थे। कहानी, उपन्यास, यात्रा वृतांत, निबंध, आलोचना आदि के साथ-साथ इन्होंने कविता लेखन का भी कार्य किया।

प्रमुख रचनाएं- नदी के द्वीप, शेखर एक जीवनी, कोठरी की बात इत्यादि इनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

मैंने देखा एक बूँद कविता का सारांश- Maine Dekha Ek Bund Poem Short Summary

मैंने देखा एक बूंद कविता कवि अज्ञेय द्वारा रचित एक मुक्तक काव्य है। इस कविता के माध्यम से कवि अज्ञेय कबीरदास के विचारधारा का समर्थन करते हैं। कवि ने ईश्वर को सत्य कहा है, कवि के अनुसार शरीर नश्वर है, जो समुद्र के उस बूंद के समान है, जो सूरज के तपिश के कारण आसमान में बादल बनकर कहीं दूर चला जाता है।

मैंने देखा एक बूँद कविता- Maine Dekha Ek Bund Poem

मैंने देखा
एक बूँद सहसा
उछली सागर के झाग से;
रँग गई क्षणभर
ढलते सूरज की आग से।
मुझको दीख गया :
सूने विराट् के सम्मुख
हर आलोक-छुआ अपनापन
है उन्मोचन
नश्वरता के दाग से!

कठिन शब्द- 

सहसा- अचानक, क्षणभर- थोड़ा समय, दीख – देखना, सम्मुख- पास, उन्मोचन- मुक्ति पाना, नश्वरता- विनाश होने की स्थिति।

मैंने देखा एक बूंद कविता की व्याख्या- Maine Dekha Ek Bund Poem Explanation

मैंने देखा
एक बूँद सहसा
उछली सागर के झाग से;
रँग गई क्षणभर
ढलते सूरज की आग से।
मुझको दीख गया :
सूने विराट् के सम्मुख
हर आलोक-छुआ अपनापन
है उन्मोचन
नश्वरता के दाग से!

भावार्थ- प्रस्तुत काव्य पंक्तियां कवि अज्ञेय द्वारा रचित ‘मैंने देखा एक बूंद’ से ली गई है। इस कविता में कवि कहते हैं कि मैंने देखा कि समुद्र के झाग से एक बूंद उछलकर अलग हो जाती है।

प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि अज्ञेय ने जीवन में क्षण के महत्व को स्थापित किया है। दूसरे शब्दों में यदि कहा जाए तो कवि ने भारतीय जीवन दर्शन और आत्मा एवं परमात्मा के संबंध को उजागर किया है।

कवि कहते हैं कि समुंद्र की बूंदों का अस्तित्व समुद्र के भीतर नहीं है। समुंद्र के बूंदों का असली अस्तित्व का तब पता चलता है जब वह लहरों के झांक से उछलकर अलग हो जाती हैं और सूरज की तपिश के कारण जब वह आसमान में भाप बन जाती है। तब समुंद्र की बूंदों का अस्तित्व का बोध होता है। 

बूंद के अलग होने से सागर को कोई क्षति नहीं पहुंचती हैं, बल्कि बूंद का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। जब समुंद्र की बूंदे सागर के झांक से छलांग मारती हैं। उस वक्त समुंद्र के बूंदों के ऊपर सूर्य की रोशनी पड़ती है। जिसके कारण समुद्र की बूंदे सोने की तरह चमकने लगती है। फिर विलुप्त होकर अपनी महत्व को बताती है।

प्रतिकों के माध्यम से कवि अज्ञेय यह बताना चाहते हैं कि समुंदर के बूंदों की तरह मनुष्य के जीवन का हर एक पल बहुत ही कीमती होता है। 

कवि अज्ञेय के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन के अनमोल क्षणों को व्यर्थ ही नष्ट नहीं करना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन के हर क्षण को उपयोग में लगाना चाहिए। ताकि जीवन में कभी भी उसे इस बात का अफसोस ना हो कि उसने अपना कीमती समय नष्ट किया है।

जिस तरीके से बूंदे समुंद्र से अलग होकर अपने अस्तित्व को मिटा देती है। वैसे ही यदि मनुष्य के जीवन से कीमती वक्त निकल जाता है तो इससे वक्त का कुछ नहीं बिगड़ता मगर मनुष्य का बहुत कुछ नष्ट हो जाता हैं। इसलिए समय के अनुसार व्यक्ति को चलना चाहिए और समय को महत्व देना चाहिए।

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