Hindi Vasant Class 6 Chand Se Thodi Si Gappe- चाँद से थोड़ी सी गप्पें

शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय: शमशेर बहादुर सिंह का जन्म मुज़फ़्फरनगर में तथा शिक्षा देहरादून और प्रयाग में हुई। ये हिन्दी तथा उर्दू भाषा के विद्वान कवि थे तथा इनकी शैली अंग्रेज़ी कवि एज़रा पाउंड से प्रभावित है। इन्हें अपने लेखों के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, कबीर पुरस्कार तथा मैथिलीशण गुप्त पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

चाँद से थोड़ी सी गप्पें कविता का सार: प्रस्तुत कविता हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और कवि श्री शमशेर बहादुर सिंह द्वारा लिखी गई है। इस कविता में एक दस-ग्यारह साल की लड़की को चाँद से  गप्पें लड़ाते हुए अर्थात् बातें करते हुए दिखाया गया है। वह चाँद से कह रही है कि यूं तो आप गोल हैं, पर थोड़े तिरछे-से नज़र आते हैं। आपने इस तारों-जड़ित आकाश का वस्त्र पहना हुआ है तथा उसके बीच में से आपका केवल ये गोरा-चिट्टा और गोल-मटोल चेहरा ही दिखाई देता है।

वो चाँद से कहती है कि हम जानते हैं कि आपको कोई बीमारी है, तभी तो आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं और बढ़ते हैं तो बढ़ते ही रहते हैं। आप ऐसा तब तक करते हैं, जब तक आप पूरे गोल नहीं हो जाते। वो आगे कहती है, पता नहीं क्यों आपकी ये बीमारी ठीक ही नहीं होती। इस तरह कवि ने चाँद के प्रति एक छोटी-सी बच्ची की भावनाओं का बड़ा ही रोचक और मनभावन चित्रण किया है।

Ncert Solution for Class 6 Hindi Vasant All Chapters

Chapter 01. वह चिड़िया जो (केदारनाथ अग्रवाल)
Chapter 04. चाँद से थोड़ी-सी गप्पें (शमशेर बहादुर)
Chapter 10. झाँसी की रानी (सुभद्रा कुमारी चौहान)
Chapter 13. मैं सबसे छोटी होऊँ (सुमित्रानन्द पंत)
Chapter 16. वन के मार्ग में (वन के मार्ग में तुलसीदास)

Chand Se Thodi Si Gappe- चाँद से थोड़ी सी गप्पें

गोल हैं खूब मगर
आप तिरछे नज़र आते हैं ज़रा।
आप पहने हुए हैं कुल आकाश
तारों-जड़ा;
सिर्फ मुँह खोले हुए हैं अपना
गोरा-चिट्टा
गोल-मटोल,
अपनी पोशाक को फैलाए हुए चारों सिम्त।

आप कुछ तिरछे नज़र आते हैं जाने कैसे
– खूब हैं गोकि!
वाह जी, वाह!
हमको बुद्द्धू ही निरा समझा है!
हम समझते ही नहीं जैसे कि
आपको बीमारी है:

आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं,
और बढ़ते हैं तो बस यानी कि
बढ़ते ही चले जाते हैं
दम नहीं लेते हैं जब तक बिल्कुल ही
गोल ना हो जाएंँ,
बिल्कुल गोल।

यह मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में….
आता है।

CBSE Class 6 Hindi Chand Se Thodi Si Gappe Poem Summary

गोल हैं खूब मगर
आप तिरछे नज़र आते हैं ज़रा।
आप पहने हुए हैं कुल आकाश
तारों-जड़ा;
सिर्फ मुँह खोले हुए हैं अपना
गोरा-चिट्टा
गोल-मटोल,
अपनी पोशाक को फैलाए हुए चारों सिम्त।
चाँद से थोड़ी सी गप्पें सारांश प्रथम पद: चाँद से थोड़ी सी गप्पें कविता के प्रथम पद में बालिका चाँद से कह रही है कि यूं तो आप गोल हैं, पर फिर भी थोड़े-से तिरछे दिखाई देते हैं। ये आकाश मुझे आपके वस्त्र की तरह नज़र आता है, जिसमें अनगिनत तारे जड़े हुए हैं तथा इस पूरे विशाल पोशाक-रूपी आसमान में आप अकेले ही गोल-मटोल और गोरे-चिट्टे-से अपनी आभा फैलाए हुए दिखाई पड़ते हैं।

आप कुछ तिरछे नज़र आते हैं जाने कैसे
– खूब हैं गोकि!
वाह जी, वाह!
हमको बुद्द्धू ही निरा समझा है!
हम समझते ही नहीं जैसे कि
आपको बीमारी है:
चाँद से थोड़ी सी गप्पें सारांश द्वितीय पद: चाँद से थोड़ी सी गप्पें कविता के इस पद में लड़की चाँद से कहती है कि ये जो आप थोड़े-से तिरछे से नज़र आते हो, अच्छे तो लगते हो, पर हमको आप बेवकूफ़ ना समझना, हम सब जानते हैं कि आपका ये तिरछापन आपकी किसी बीमारी की वजह से है।

आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं,
और बढ़ते हैं तो बस यानी कि
बढ़ते ही चले जाते हैं
दम नहीं लेते हैं जब तक बिल्कुल ही
गोल ना हो जाएंँ,
बिल्कुल गोल ।

यह मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में….
आता है।
चाँद से थोड़ी सी गप्पें सारांश तृतीय पद: चाँद से थोड़ी सी गप्पें कविता के इस अंतिम पद में बालिका चाँद से कहती है कि आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं और बढ़ते हैं तो बढ़ते ही चले जाते हैं। पता नहीं क्यों, आपकी ये बीमारी ठीक ही नहीं हो रही है। अतः छोटी बालिका चाँद के घटते और बढ़ते रूप को एक बीमारी समझ रही है।


Ncert Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Chand Se Thodi Si Gappe

प्रश्न.१. कविता में ‘आप पहने हुए हो कुल आकाश ‘ कहकर लड़की क्या कहना चाहती है?
उ.१.  कविता में लड़की कहना चाहती है कि चाँद, तारों से जड़ित संपूर्ण आकाश-रूपी वस्त्र को पहने हुए है।

Ncert Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Chand Se Thodi Si Gappe

प्रश्न.२. ‘हमको बुद्धू ही निरा समझा है’ , कहकर लड़की क्या कहना चाहती है?
उ.२.  लड़की यह कहना चाहती है कि चाँद उसे बुद्धू ना समझे, वह चतुर है और जानती है कि चाँद को कोई बीमारी है।

Ncert Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Chand Se Thodi Si Gappe

प्रश्न.३. आशय बताओ:
‘ यह मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में आता है।’
उ.३.  इस पंक्ति का आशय यह है कि लड़की को लगता है कि चांँद को कोई बीमारी है, जो कि ठीक ही नहीं हो रही है क्योंकि यदि वो घटते हैं तो घटते ही जाते हैं और बढ़ते हैं तो बढ़ते ही चले जाते हैं, जब तक कि पूरे गोल ना हो जाएं।

Ncert Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Chand Se Thodi Si Gappe

प्रश्न.४. कवि ने चांँद से गप्पें किस दिन लगाई होंगी? इस कविता में आई बातों की मदद से अनुमान लगाओ और उसका कारण भी बताओ।
उ.४.  कवि ने चाँद से गप्पें निम्नलिखित दिनों में लगाई होंगी –

दिन कारण
पूर्णिमा इस दिन चांँद पूरा गोल नज़र आता है।
अष्टमी से पूर्णिमा के बीच इन दिनों में चांँद कुछ तिरछा दिखाई देता है।

Chand Se Thodi Si Gappe Extra questions 

प्रश्न.१. कविता में बालिका ने चाँद की पोशाक किसे बताया है?
उ.१.  कविता में बालिका ने पूरे आकाश को चाँद की पोशाक बताया है।

प्रश्न.२. बालिका किसे चाँद की बीमारी समझ रही है?
उ.२.  बालिका चाँद के तिरछेपन को उसकी बीमारी समझ रही है।

प्रश्न.३. कविता के अनुसार चाँद आकाश में कैसा नज़र आता है?
उ.३.  कविता के अनुसार चाँद पूरे आकाश में गोल-मटोल और गोरा-चिट्टा सा चमकता हुआ नज़र आता है।

प्रश्न.४. बालिका क्यों कहती है कि चाँद की बीमारी ठीक ही नहीं होने को आ रही है?

उ.४.  बालिका ऐसा इसीलिए कहती है क्योंकि चाँद घटता है तो घटता ही चला जाता है और बढ़ता है तो बढ़ता ही जाता है जब तक कि वह गोल ना हो जाए। उसे ये एक बीमारी जान पड़ती है।

प्रश्न.५. कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?
उ.५.  कविता के माध्यम से कवि प्रकृति और मनुष्य के बीच के अद्भुत रिश्ते को एक छोटी-सी बालिका के चाँद के साथ संवाद के द्वारा चित्रित करना चाहते हैं।