Class 11 Hindi Aroh Chapter 18 – कक्षा 11 हिंदी आरोह पाठ 18

Table of Content:
1. अक्क महादेवी का जीवन परिचय
2. अक्क महादेवी के वचन कविता का सारांश 
3. अक्क महादेवी के वचन कविता
4. अक्क महादेवी के वचन कविता का भावार्थ
5. अक्क महादेवी के वचन कविता का प्रश्न अभ्यास
6. Class 11 Hindi Aroh Chapters Summary

अक्क महादेवी का जीवन परिचय – Akka Mahadevi Ka Jeevan Parichay 

अक्क महादेवी का जन्म 12 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में स्थित उदुतदी नाम के स्थान पर हुआ था l बाल्यावस्था से ही ये मल्लिकार्जुन अर्थात भगवान शिव की भक्ति करने लगी l मात्र 10 वर्ष की आयु में इन्होंने शिव गुरू का मंत्र ले लिया l इन्होंने भगवान शिव की भक्ति को अपनी कविताओं में बखूबी चित्रित किया l

अक्क महादेवी वीर शैव धर्म से संबंधित महिला थी जिन्होंने अपने वचनों के कारण बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की l इनके वचनों को कन्नड़ भाषा में उच्च स्थान प्राप्त है l इन्होंने लगभग चार सौ तीस वचन कहें l इनका मानना था कि वे केवल नाम मात्र से स्त्री हैं, किंतु उनका, शरीर, आत्मा सब प्रभु शिव का है l

अक्क महादेवी कविता का सारांश – Akka Mahadevi Class 11 Summary

अक्क महादेवी की कविता हे! भूख मत मचल बहुत ही मर्मस्पर्शी कविता है। अक्क महादेवी जी कर्नाटक के प्रसिद्ध कवयित्री के रूप में जानी जाती है। इस कविता में कवयित्री भूख से कहती हैं कि तू ज्यादा मत मचल इससे उनकी भक्ति में अवरोध उत्पन्न होता है।

कवयित्री कविता के माध्यम से ईश्वर के प्रति अपनी संपूर्ण भक्ति को व्यक्त करती है। प्रस्तुत कविता में अहंकार को नष्ट कर ईश्वर की भक्ति में खुद को समाहित करने की बात की गई है।

अक्क महादेवी के वचन कविता – Akka Mahadevi Ke Vachan

(1 )

हे भूख मात मचल,
हे प्यास, तड़प, मन है नींद,
मत सता क्रोध,
मचा मत उथल पुथल हे
मोह पाश अपने ढील लोभ
मत ललचा हे मद मत कर ,
मदहोश इर्ष्या जला मत,
चराचर मत चूक अवसर आई हूँ,
संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का 

(2 )

हे मेरे  जूही के फूल जेसे ईश्वर,
मँगवाओ मुझसे भीख,
और कुछ ऐसा करो कि भूल जाऊँ
अपना घर, पूरी तरह झोली फैलाऊँ,
मिले भीख कोइ,
हाथ बढ़ाए कुछ
देने को तो वह गिर जाये,
और यदि में नीचे झुकूँ उसे उठाने
तो कोई कुत्ता और उसे
झपटकर छीन ले मुझसे l

अक्क महादेवी के वचन कविता की व्याख्या – Akka Mahadevi Ke Vachan Poem Summary

हे भूख मात मचल,
हे प्यास, तड़प, मन है नींद,
मत सता क्रोध,
मचा मत उथल पुथल हे
मोह पाश अपने ढील लोभ
मत ललचा हे मद मत कर ,
मदहोश इर्ष्या जला मत,
चराचर मत चूक अवसर आई हूँ,
संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का

व्याख्या- कवयित्री कहती हैं कि हे भूख, प्यास, मुझे मत सता, मेरे भीतर जो क्रोध मुझे मत सता, मुझे नींद ना आये एसा कुछ कर, मेरे भीतर जो उथल पुथल चल रही है उससे मुझे बचा ले l मुझे किसी बंधन में मत बाँध, मेरे भीतर किसी लोभ मोह को मत जगा, मुझे दूसरों की खुशियाँ देख कर इर्ष्या करने से रोक ले l यह अवसर मत चुको, मुझे भगवान शिव की उपासना का अवसर मिला है l

हे मेरे  जूही के फूल जेसे ईश्वर,
मँगवाओ मुझसे भीख,
और कुछ ऐसा करो कि भूल जाऊँ
अपना घर, पूरी तरह झोली फैलाऊँ,
मिले भीख कोइ,
हाथ बढ़ाए कुछ
देने को तो वह गिर जाये,
और यदि में नीचे झुकूँ उसे उठाने
तो कोई कुत्ता और उसे
झपटकर छीन ले मुझसे l
व्याख्या- कवयित्री कहती हैं कि हे जूही के फूल जैसे ईश्वर मेरी ऐसी परिस्थिति बनाओ की मुझे भीख माँगनी पड़े, और फिर ऐसा कर दो कि कोइ मुझे भीख दे। अगर कोइ देना भी चाहे तो वह नीचे गिर जाए l और मैं अगर उसे उठाने के लिए झुकूं तो कोइ कुत्ता उसे मुझसे छीन लेl इससे मेरे भीतर जो भी अंहकार है, वो टूट जाय और में अपने भगवान मल्लिकाअर्जुन की भक्ति में लीन हो सकूँl

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