Hastakshep Class 11 Hindi Antra Chapter 18 Question Answer

हस्तक्षेप कविता प्रश्न उत्तर- श्रीकांत वर्मा (अंतरा भाग 1 पाठ 18)

हस्तक्षेप प्रश्न 1. मगध के माध्यम से ‘हस्तक्षेप’ कविता किस व्यवस्था की ओर इशारा कर रही है?

उत्तर – प्रस्तुत काव्य में कवि ने हस्तक्षेप कविता के माध्यम से आज के हमारे वर्तमान समाज की और घोर कटाक्ष किया है। आज के समाज में लोग विरोध करना भूल चुके हैं व अन्याय को चुपचाप सहते हैं। गलत होते देखते हैं, मगर कुछ कहते नहीं, बस चुप होकर अन्याय को सह लेते हैं। यह गलत है, बस इसी ओर इस कविता में कवि ने कुछ बातें कही हैं जो बिल्कुल सत्य हैं।

हमें हमेशा अन्याय का विरोध करना चाहिए, न कि चुप रहकर तमाशा देखना चाहिए। हमारी चुप्पी शायद बहुत बर्बादी ला सकती है। मगर यदि हम विरोध करेंगे, तो शायद हमारे विरोध की वजह से बहुत लोगों का बहुत कुछ बिगड़ते बिगड़ते बन सकता है।

हस्तक्षेप प्रश्न 2. व्यवस्था को ‘निरंकुश’ प्रवृत्ति से बचाए रखने के लिए उसमें ‘हस्तक्षेप’ ज़रूरी है – कविता को दृष्टि में रखते हुए अपना मत दीजिए।

उत्तर – इस प्रश्न का उत्तर अगर आपको चाहिए, तो आप खुद को वर्तमान समाज से अच्छी तरह से जोड़ लिजिए। आज हमारे वर्तमान समाज में क्या कुछ गलत नहीं हो रहा है। आप बताइए यह गलत क्यों हो रहा है, क्योंकि हम मानवों ने विरोध करना बंद कर दिया है। हम सिर्फ बैठकर तमाशा देखते हैं। अगर कोई विरोध करता है, तो हम उसके पीछे उसी की बातें बनाते हैं।

हमारे देश का कानून हमारी वजह से है, हमारे देश का कानून हमारा है। अगर देश का कानून हमारे लिए कुछ अच्छा नहीं कर पाता, तो हमें उसे बुरा करने का भी कोई अधिकार नहीं है।

अगर हमारे साथ कुछ गलत हो रहा है, तो हमें बिल्कुल डटकर उसका विरोध करना चाहिए। इससे बहुत सारे लोगों का बहुत कुछ बिगड़ सकता है। अगर हम विरोध करना नहीं सीखेंगे, तो जिंदगी में आगे भी नहीं बढ़ेंगे। इसलिए जिंदगी में कुछ पाने के लिए हस्तक्षेप करना बहुत ज़रूरी है।

हस्तक्षेप प्रश्न 3. मगध निवासी किसी भी प्रकार से शासन व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से क्यों कतराते हैं?

उत्तर- मगध के निवासी किसी भी प्रकार से शासन व्यवस्था में हस्तक्षेप इसलिए नहीं करना चाहते क्योंकि उनके राजा उनसे ज्यादा ताकतवर हैं। वे तो बस छोटे मोटे लोग हैं, इसलिए विरोध करने से डरते हैं।

उन्हें डर लगता है कि अगर वह अपने राजा का विरोध करेंगे, तो शायद उनके राजा उन पर और भी ज्यादा कहर बरसाऐंगे। वे उन पर और भी ज्यादा जुल्म करेंगे, अत्याचार करेंगे। बस इसी भय से, इसी डर से मगध के निवासी किसी भी शासन व्यवस्था के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते हैं। बस हो रहे अत्याचार को चुपचाप सह लेते हैं। कहीं उनकी दशा और भी ज्यादा खराब ना हो जाए, इस डर से वे किसी भी चीज का विरोध नहीं कर पाते हैं।

हस्तक्षेप प्रश्न 4. ‘मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं’ – के आधार पर मगध की स्थिति का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर- एक वक्त था, जब मगध को बहुत ताकतवर राज्य माना जाता था। मगर आज एक समय है, जब मगध में लोग डर से रहने लगे हैं। मगध के लोग वहां की शासन व्यवस्था से इतने डर चुके हैं कि डर के मारे आवाज उठाना, मुंह से कुछ भी कहना भूल चुके हैं।

वे सिर्फ चुपचाप अन्याय को सहते हैं, उससे जूझते हैं। वे मुंह से आवाज तक निकालना जरूरी नहीं समझते। एक वक्त था, जब मगध में इतनी अच्छी शासन व्यवस्था थी कि कौन अमीर है, कौन गरीब है, इस बात से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था। बस इंसानियत के खातिर सब एक-दूसरे के साथ मुसीबत के वक्त में खड़े हो जाते थे। कौन राजा होता था कौन प्रजा होता था, यह अंतर भी समझ में नहीं आता था। मगर आज मगध की स्थिति बहुत ही अलग है।

आज राजा, प्रजा पर अन्याय करता है, अत्याचार करता है। इसलिए, मगध के लोग अब मगध में रहने से भी डरते हैं, उन्हें अपने यहां रहने से डर लगता है।

हस्तक्षेप प्रश्न 5. मुर्दे का हस्तक्षेप क्या प्रश्न खड़ा करता है? प्रश्न की सार्थकता को कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- हम अक्सर यह बातें सुनते हैं कि वह मर कर भी जीवित है। अर्थात जब लोग बोलना बंद कर देते हैं, किसी भी चीज का विरोध करना बंद कर देते हैं, तो उनकी तुलना एक मुर्दे के साथ की जाती है। मुर्दा एक ऐसा व्यक्ति है, जो मरने के बाद बोल सकता है, बिना किसी डर के अपनी बातों को रख सकता है।

मगर मरे हुए लोगों में और जिंदा लोगों में एक ही अंतर है कि जिंदे आदमी को विरोध करने से डर लगता है और मरे हुए लोगों को डर नहीं लगता है। वह बोलना जानता है कि कैसे कहां क्या बोलना है, मगर मुर्दे की बात को सुनने वाला कोई नहीं है। वहीं जिंदा लोगों की बातों को लोग सुन सकते हैं, मगर वे डर के कारण बोल नहीं पा रहे हैं।

हस्तक्षेप प्रश्न 6. ‘मगध को बनाए रखना है, तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए’ – भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- मगध के लोग विरोध इसलिए नहीं करते क्योंकि वहां के लोगों के ऊपर दबाव है। अगर वे विरोध करेंगे, तो मगध की शांति में बाधा एवं विघ्न आ सकता है। इसलिए मगध के लोगों को डराया जाता है कि अगर वे अन्याय का विरोध करेंगे तो उन लोगों की शांति भंग हो सकती है और अन्य राज्यों में भी मगध की बदनामी हो सकती है। इसलिए, अगर मगध को बनाए रखना है, तो सबकुछ सहते हुए शांतिपूर्वक रहना पड़ेगा।

भले ही, लोगों के साथ गलत हो, अत्याचार हो, मगर उन्हें चुपचाप सब सहना होगा। उन्हें मगध की शांति को बनाए रखना होगा, ताकि मगध का नाम दूर-दूर तक ऊंचा हो।

हस्तक्षेप प्रश्न 7. ‘हस्तक्षेप’ कविता सत्ता की क्रूरताऔर उसके कारण पैदा होने वाली प्रतिरोध की कविता है- स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- हस्तक्षेप कविता के माध्यम से कवि श्रीकांत वर्मा जी मगध की शासन व्यवस्था की ओर व्यंग्य करते हैं। कवि के व्यंग्य करने के पीछे कारण यह है कि मगध के निवासी गलत चीजों का विरोध तो करना चाहते हैं, मगर वे दबाव के कारण आवाज नहीं निकालते। वे चुपचाप अन्याय को सहते हैं और उसके खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं। इसलिए कवि ने मगध की शासन व्यवस्था को दिखाया है।

कवि के अनुसार, शासन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो जनता के पक्ष में हो, न कि जनता के विरोध में। किसी भी देश या किसी भी राज्य का शासन उसकी प्रजा के अनुसार होना चाहिए न कि राजा के अनुसार। एक प्रजा क्या चाहती है, शासन व्यवस्था को उसी अनुसार चलना चाहिए। मगध साम्राज्य की शासन व्यवस्था बिल्कुल उल्टी है। यहां पर शासन किया जाता है, उस के अनुसार प्रजा को चलना पड़ता है। कवि इस बात के लिए इस कविता का शीर्षक हस्तक्षेप रखते हैं।

हस्तक्षेप प्रश्न 8. निम्नलिखित लाक्षणिक प्रयोगों को स्पष्ट कीजिए-

उत्तर-

  • कोई छींकतातक नहीं- इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने मगध की शासन व्यवस्था पर व्यंग्य किया है और कहा है कि यहां की जनता मगध की शासन व्यवस्था से परेशान जरूर है, मगर वह फिर भी मजबूरी में इस शासन व्यवस्था के खिलाफ आवाज नहीं उठाती है और चुपचाप अन्याय को सहती है।
  • कोई चीखतातक नहीं- इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने यह बताने का प्रयास किया है कि यदि मगध के शासन के विरुद्ध कोई व्यक्ति कुछ बोलना चाहता है, तो उस पर दबाव डाल दिया जाता है। उस पर इतना जोर डाल दिया जाता है कि व्यक्ति चाह कर भी कुछ नहीं बोलता है। फिर, वह निशब्द हो जाता है।
  • कोई टोकता तक नहींइन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि मगध के लोग अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध आवाज क्यों नहीं उठाते हैं या मुझे समझ में नहीं आ रहा है। ये लोग क्यों और किस कारण अन्याय को सह रहे हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है। आखिर ये कब तक चुप रहेंगे, कब तक ऐसे अन्याय को सहते रहेंगे।

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हस्तक्षेप कविता का अर्थ

हस्तक्षेप कविता का सारांश
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