वसंत भाग 3 कक्षा 8 पाठ 6 – Hindi Vasant Class 8 Chapter 15 Solutions

सूरदास के पद अर्थ सहित – Surdas Ke Pad Class 8 Explanation

सूरदास का जीवन परिचय- Surdas Ka Jeevan Parichay: सूरदास जी को हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक माना जाता है। इनका जन्म सन् 1468 में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पास स्थित रुनकता गांव में हुआ। ये प्रभु श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। इनके जन्म से अंधे होने के बारे में विद्वानों में मतभेद है। इन्होंने हिंदी काव्य के स्तर को काफी ऊपर पहुँचाया। इनकी प्रमुख रचनाएं सूरसागर, सूरसारावली, नल-दमयंती, साहित्य-लहरी, ब्याहलो आदि मानी जाती हैं। 

Hindi Vasant Class 8 Solutions All Chapters
Chapter 01. ध्वनि(सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला”)
Chapter 04. दीवानों की हस्ती(भगवती चरण वर्मा)
Chapter 06. भगवन के डाकिये(रामधारी सिंह दिनकर)
Chapter 08. यह सबसे कठिन समय(जया जादवानी)
Chapter 09. कबीर की सखियाँ (कबीर)
Chapter 12. सुदामा चरित(नरोत्तमदास)
Chapter 15. सूर के पद(सूरदास)


सूरदास के पद  – Surdas Ke Pad Class 8

(1)
मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी?
किती बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।
तू जो कहति बल बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी।
काढ़त गुहत न्हवावत जैहै, नागिनी सू भुइँ लोटी।
काँचौ दूध पियावत पचि पचि, देति न माखन रोटी।
सूरज चिरजीवौ दौ भैया, हरि हलधर की जोटी।

(2)
तेरैं लाल मेरौ माखन खायौ।
दुपहर दिवस जानि घर सूनो ढ़ूँढ़ि ढँढ़ोरि आपही आयौ।
खोलि किवारि, पैठि मंदिर मैं, दूध दही सब सखनि खवायौ।
ऊखल चढ़ि, सींके कौ लीन्हौ, अनभावत भुइँ मैं ढ़रकायौ।
दिन प्रति हानि होति गोरस की, यह ढ़ोटा कौनैं ढ़ँग लायौ।
सूर स्याम कौं हटकि न राखै तैं ही पूत अनोखौ जायौ।


सूरदास के पद कविता का सारांश- Surdas Ke Pad Meaning in Hindi: यहां महाकवि सूरदास जी के दो पद दिए गए हैं। दोनों ही पद श्रीकृष्ण की बाललीलाओं पर केंद्रित हैं। इनकी भाषा बड़ी ही सरल, प्यारी और मंत्रमुग्ध कर देने वाली है।

प्रथम पद में सूरदास जी श्रीकृष्ण के बालपन के एक किस्से के बारे में बता रहे हैं। जब यशोदा माँ कान्हा को दूध पिलाने के लिए ये कह देती हैं कि इससे उनकी चोटी बलराम जितनी लंबी और मोटी हो जाएगी। मगर काफी दिन दूध पीने के बाद भी कान्हा को अपनी चोटी छोटी ही दिखती है। तब वो यशोदा माँ से इस बारे में पूछने लगते हैं।

द्वितीय पद में सूरदास जी ने श्रीकृष्ण की माखनचोरी के बारे में बताया है। कान्हा अपने सभी सखाओं के साथ मिलकर, गोपियों के घर से माखन (मक्खन) चुरा कर खा जाते हैं और कुछ माखन जमीन पर फैला जाते हैं। इस पद में गोपियां यशोदा माँ को इसी बात का उलाहना देने आई हैं।

सूरदास के पद अर्थ सहित – Surdas Ke Pad Class 8 Explanation

(1)
मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी?
किती बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।
तू जो कहति बल बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी।
काढ़त गुहत न्हवावत जैहै, नागिनी सू भुइँ लोटी।
काँचौ दूध पियावत पचि पचि, देति न माखन रोटी।
सूरज चिरजीवौ दौ भैया, हरि हलधर की जोटी।
सूरदास के पद अर्थ सहित: कवि सूरदास जी अपने इस पद में कान्हा जी के बचपन की एक लीला का वर्णन किया है। इसके अनुसार, यशोदा माता कान्हा को दूध पिलाने के लिए कहती हैं कि इससे उनकी छोटी-सी चोटी, लंबी और मोटी हो जाएगी। कान्हा इसी विश्वास में काफी दिन दूध पीते रहते हैं। एक दिन उन्हें ध्यान आता है कि उनकी चोटी तो बढ़ ही नहीं रही है।

तब वो यशोदा माँ से कहते हैं, माँ मेरी चोटी कब बढ़ेगी? मुझे दूध पीते हुए इतना समय हो गया है, लेकिन ये तो अब भी छोटी ही है। आपने तो कहा था कि दूध पीने से मेरी चोटी किसी बेल की तरह लंबी और मोटी हो जाएगी। फिर उसे कंघी से काढ़ा जाएगा, गूंथा जाएगा, फिर नहाते समय वो किसी नागिन की तरह लहराएगी। फिर कान्हा अपनी माँ से शिकायत करते हैं कि उन्होंने चोटी का लालच देकर उन्हें कच्चा दूध पिलाया है, जबकि उन्हें तो माखन-रोटी पसंद है। 

अंतिम पंक्ति में कवि सूरदास कान्हा और बलराम की जोड़ी ओर मुग्ध होकर उनकी लंबी उम्र की कामना करते हैं।

(2)
तेरैं लाल मेरौ माखन खायौ।
दुपहर दिवस जानि घर सूनो ढ़ूँढ़ि ढँढ़ोरि आपही आयौ।
खोलि किवारि, पैठि मंदिर मैं, दूध दही सब सखनि खवायौ।
ऊखल चढ़ि, सींके कौ लीन्हौ, अनभावत भुइँ मैं ढ़रकायौ।
दिन प्रति हानि होति गोरस की, यह ढ़ोटा कौनैं ढ़ँग लायौ।
सूर स्याम कौं हटकि न राखै तैं ही पूत अनोखौ जायौ।
सूरदास के पद अर्थ सहित: कवि सूरदास जी ने अपना यह पद कान्हा की माखनचोरी की लीला को समर्पित किया है। गोपियां यशोदा माँ के पास आकर कहती हैं –

‘हे यशोदा! तुम्हारे पुत्र कृष्ण ने हमारा मक्खन चोरी करके खा लिया है। दोपहर में वो घर को सूना देखकर घर में घुस गया और अपने दोस्तों के साथ मिलकर सारा दूध-दही खा गया।’

आगे गोपियाँ कहती हैं,

‘कान्हा ने ओखली पर चढ़कर छींके से मक्खन उतारा और खा-पीकर कुछ मक्खन ज़मीन पर भी फैला दिया। यशोदा, आपने ऐसा उत्पाती लड़का पैदा कर दिया है, जिसकी वजह से हमें हर रोज़ दूध-दही का नुकसान हो रहा है। आप उसे रोकती क्यों नहीं हो, क्या आपने ही एक अनोखे पुत्र को जन्म दिया है?’


सूरदास के पद प्रश्न-उत्तर – Ncert Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 15 

सूरदास के पद प्रश्न 1. बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?
Ncert Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 15
उत्तर. बालक श्रीकृष्ण अपनी चोटी अपने बड़े भाई बलराम जितनी मोटी करना चाहते थे। माता यशोदा ने उन्हें कहा था कि दूध पीने से उनकी चोटी मोटी हो जाएगी। वो इसी लोभ में दूध पीने के लिए तैयार हो गए। 

सूरदास के पद प्रश्न 2. श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या सोच रहे थे?
Ncert Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 15
उत्तर. श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में सोच रहे हैं कि मोटी होने के बाद उनकी चोटी भी नहाते समय बलराम भैया की चोटी की तरह नागिन की भाँति लहराएगी। 

सूरदास के पद प्रश्न 3. दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौन-से खाद्य पदार्थ को अधिक पसंद करते हैं?
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उत्तर. श्रीकृष्ण को दूध की तुलना में माखन-रोटी सर्वाधिक प्रिय है। 

सूरदास के पद प्रश्न 4. ‘तैं ही पूत अनोखो जायौ’ – पंक्ति में ग्वालन के मन के कौन-से भाव मुखरित हो रहे हैं?
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उत्तर. उक्त पंक्तियों में ग्वालन श्रीकृष्ण जैसा पुत्र पाने पर ईर्ष्या का भाव और माखन की चोरी की वजह से गुस्सा दर्शाती है। इसीलिए वो यशोदा माँ को उलाहना दे रही है। 

सूरदास के पद प्रश्न 5. मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?
Ncert Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 15
उत्तर. श्रीकृष्ण ऊँचे छींकों पर रखा मक्खन नहीं उतार पाते थे। इसीलिए वो अपने सखाओं की मदद से मक्खन चुराते हैं। वो आधा मक्खन खुद खाते थे, आधा अपने सखाओं को खिलाते थे। इस दौरान मक्खन ज़मीन पर गिर जाता था।

सूरदास के पद प्रश्न 6. दोनों पदों में से आपको कौन-सा पद अधिक अच्छा लगा और क्यों?
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उत्तर. हमें पहला पद बहुत अच्छा लगा। उसमें सूरदास जी ने कृष्ण भगवान के बाल रूप का बहुत ही मनोहर चित्रण किया है। जब कृष्ण दूध पीने में आनाकानी करते थे, तो माँ यशोदा उन्हें चोटी बढ़ाने की बात बोलकर दूध पिलाती हैं। कुछ समय बीतने के बाद भी कान्हा को अपनी चोटी मोटी होती नजर नहीं आई, तो वो अपनी माँ से पूछते हैं कि उनकी चोटी मोटी क्यों नहीं हो रही है। उनके ये बाल तर्क-वितर्क हमें बेहद प्यारे लगते हैं।