Harihar Kaka Class 10 Summary – Sanchayan Chapter 1

प्रस्तुत पाठ में हम कक्षा 10 की पुस्तक संचयन भाग 2 के पहले पाठ हरिहर काका का सारांश, भूमिका और उद्देश्य (Sanchayan Class 10 Chapter 1 Harihar Kaka Summary) पढ़ेंगे।

Sanchayan Chapter 1 Harihar Kaka Class 10 Summary

हरिहर काका विषय सूची

  • मिथिलेश्वर जी का जीवन परिचय
  • हरिहर काका पाठ के पात्रों का परिचय
  • हरिहर काका कहानी की भूमिका
  • हरिहर काका पाठ का सारांश
  • हरिहर काका और लेखक का रिश्ता
  • हरिहर काका का गांव और ठाकुरबारी
  • हरिहर काका का परिवार
  • हरिहर काका का ठाकुरबारी जाना और घरवापसी
  • हरिहर काका का अपहरण
  • हरिहर काका का घर छोड़ना
  • हरिहर काका का मौन रूप धारण करना
  • हरिहर कहानी का उद्देश्य

हरिहर काका पाठ के पात्रों का परिचय


1. लेखक : बचपन में हरिहर काका के मित्र।

2. हरिहर काका : एक बूढ़ा व्यक्ति जिसकी दो शादियां हुई पर दोनों पत्नियां स्वर्ग सिधार गईं।

3. हरिहर काका के भाई : हरिहर काका अपने तीन भाइयों और उनकी पत्नियां और बच्चों के साथ रहते हैं।

4. महंत जी : ठाकुरबारी( मंदिर) में रहते हैं और उनके साथ साधु -संत भी मंदिर की सेवा करते हैं।

5. नेता जी : हरिहार काका की जमीन पर स्कूल बनवाने का प्रस्ताव रखते हैं।

6. अन्य पात्र : गांव के लोग, पुलिसकर्मी, नौकर।

हरिहर काका के लेखक मिथिलेश्वर जी का जीवन परिचय

मिथिलेश्वर जी का जन्म 31 दिसम्बर 1950 को बिहार के भोजपुर ज़िले के वैसाडीह गांव में हुआ। हिंदी में एम.ए और पीएच.डी करने के उपरांत व्यवसाय के रूप में अध्यापन कार्य को चुना। राँची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में रहे और फिर यूजीसी के टीचर फेलोशिप अवार्ड के तहत एच.डी जैन कॉलेज, आरा आ गये। इन दिनों आरा के विश्वविद्यालय में रीडर के पद पर कार्यरत हैं।

मिथिलेश्वर ने अपनी कहानियों में ग्रामीण जीवन को बखूबी उकेरा है। इनकी कहानियाँ वर्तमान ग्रामीण जीवन के विभिन्न अन्तर्विरोधों को उद्घाटित करती हैं, जिनसे पता चलता है कि आज़ादी के बाद ग्रामीण जीवन वास्तव में किस हद तक भयावह और जटिल हो गया है। बदलाव के नाम पर हुआ यह कि आम लोगों के शोषण के तरीके बदल गए हैं।

मिथिलेश्वर की प्रमुख कृतियाँ हैं-

कहानी संग्रह :- बाबूजी, मेघना का निर्णय, हरिहर काका, चल खुसरों घर अपने,एक और मृत्युंजय, छह महिलाएँ, एक में अनेक।

उपन्यास :- झुनिया, युद्धस्थल, प्रेम न बाड़ी ऊपजे और अंत नहीं।

आत्मकथा :- पानी बिच मीन पियासी, कहाँ तक कहें युगों की बात, जाग चेत कुछ करौ उपाई।

पुरस्कार:-

‘अखिल भारतीय पुरस्कार’ (‘सुरंग में सुबह’ उपन्यास)
‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ (‘बंद रास्तों के बीच’ पुस्तक)
‘अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार’- (‘बाबूजी’ पुस्तक)
‘अखिल भारतीय पुरस्कार’ (‘सुरंग में सुबह’ उपन्यास)

हरिहर काका कहानी की भूमिका – Harihar Kaka Class 10 Short Summary

हरिहर काका कहानी मिथिलेश्वर द्वारा रचित एक ऐसी कहानी है। जिसमें लेखक ने ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया है। हरिहर काका कहानी में लेखक ने परिवारों और धार्मिक स्थलों में बढ़ रही स्वार्थी प्रवृत्ति को दर्शाया है।

हम प्रस्तुत कहानी हरिहर काका में देख सकते हैं, कि किस तरह से हरिहर काका का शोषण होता है। यहाँ तक कि उनके ही भाई और ठाकुरबारी के महंत उनकी जमीन को अपने नाम करवाने के लालच में हरिहर काका की जान लेने की कोशिश करते हैं।

लेखक ने दूसरी तरफ गाँव की ठाकुरबारी पर भी लोगों का ध्यान खींचा है, जिस पर गाँव के लोगों को बहुत विश्वास है। उनका ठाकुरबारी पर विश्वास किस तरह से अंधविश्वास में परिवर्तित हो जाता है, यह हम कहानी में देखते हैं। ठाकुरबारी में गाँव के लोग मन्नत मांगते हैं। विश्वास रखते हैं कि यहाँ मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है। जब लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं, तब इसका पूरा श्रेय ठाकुरबारी को ही देते हैं। कुछ लोग तो इस अंधविश्वास में अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिख देते हैं।

इस कहानी में सिर्फ हरिहर काका ही हैं, जो अपनी समझदारी से लालची लोगों और अन्धविश्वास से बचते हैं।

हरिहर काका पाठ का सारांश – Harihar Kaka Class 10 Summary

हरिहर काका और लेखक का रिश्ता

Harihar Kaka Class 10 Summary: हरिहर काका कहानी गाँव में रहने वाले एक बूढ़े व्यक्ति की कहानी है, जिसने अपना पूरा जीवन साधारण बिताया है। लेखक और हरिहर काका के बीच उम्र का बड़ा फासला है। फिर भी दोनों में मित्रता है। लेखक ने अपने बचपन से हरिहर काका के दुःख को देखा है। लेखक हरिहर काका के पड़ोस में ही रहते हैं और हरिहर काका लेखक को अपने बच्चे की तरह ही प्यार करते हैं।

अपनी उम्र के इस पड़ाव में पहुँच चुके काका अपने जीवन में घटित घटनाओं से बहुत दुःखी हैं। अब उन्होंने चुप्पी साध ली है। वे शांत बैठे रहते हैं। लेखक के अनुसार हरिहर काका की इस चुप्पी को जानने के लिए, उनके अतीत को जानना आवश्यक है।

हरिहर काका का गांव और ठाकुरबारी

Harihar Kaka Class 10 Summary: लेखक का गाँव एक छोटा-सा क़स्बा है। जो आरा शहर से चालीस किलोमीटर की दूरी पर है। यह क़स्बा हसनबाजार बस स्टैंड के पास है। इस गाँव की कुल आबादी ढाई-तीन हजार है। गाँव में एक ठाकुरजी का मंदिर है। जिसे लोग ठाकुरबारी भी कहते हैं। ठाकुरबारी की स्थापना कब हुई, इसका किसी को विशेष ज्ञान नहीं है। इस संबंध में प्रचलित है कि जब गाँव बसा था, तो उस समय एक संत यहाँ झोपड़ी बनाकर रहने लगे थे। उस संत ने यहाँ ठाकुरजी की पूजा आरम्भ कर दी, फिर लोगों ने धर्म से प्रेरित होकर चंदा इकट्ठा करके ठाकुरजी का मंदिर बनवा दिया। गाँव के लोगों का मानना है कि यहाँ मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। पहले हरिहर काका रोज ठाकुरबारी जाते थे, परंतु अब परिस्थितिवश यहाँ आना बंद कर दिया है।

हरिहर काका का परिवार

Harihar Kaka Class 10 Summary: हरिहर काका चार भाई हैं। सबकी शादी हो चुकी है। उनके बच्चे भी बड़े हैं। हरिहर काका ने दो शादियाँ की थी। परंतु उन्हें बच्चे नहीं हुए। उनकी दोनों पत्नियां भी जल्दी स्वर्ग सिधार गईं। हरिहर काका ने तीसरी शादी अपनी बढ़ती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण नहीं की। वे अपने भाइयों के साथ रहने लगे। हरिहर काका के पास कुल साठ बीघे खेत हैं। प्रत्येक भाई के हिस्से पंद्रह बीघे खेत हैं। परिवार के लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं। हरिहर काका के भाइयों ने अपनी पत्नियों को काका की सेवा करने के लिए कहा। कुछ समय तक तो वें सेवा करती रहीं, लेकिन बाद में न कर सकीं। भाइयों ने अपनी पत्नियों को काका की सेवा करने के लिए इसलिए कहा ताकि हरिहर काका की पंद्रह बीघे जमीन उनको मिल जाए।

हरिहर काका का ठाकुरबारी जाना और घर वापसी

एक समय ऐसा आया जब हरिहर काका को पानी देने वाला भी कोई नहीं था और बचा हुआ भोजन उनकी थाली में परोस दिया जाता था। उस दिन उनकी सहनशक्ति समाप्त हो गई, जिस दिन हरिहर काका के भतीजे का मित्र घर आया। उस दिन घर में स्वादिष्ट पकवान बनाए गए। काका ने सोचा आज तो उन्हें कुछ अच्छा खाने को मिलेगा, लेकिन उनकी कल्पना के विपरीत उन्हें रूखा-सूखा भोजन परोसा गया। हरिहर काका आग बबूला हो गए और बहुओं को खरी-खोटी सुनाने लगे।

ठाकुरीबारी के पुजारी उस समय मंदिर के कार्य के लिए दालान में उपस्थित थे। उन्होंने मंदिर पहुँच कर इस घटना की सारी सूचना महंत को दी और महंत ने इसे शुभ संकेत माना। गाँव के लोग हरिहर काका के घर की तरफ निकल पड़े। महंत काका को समझाकर ठाकुरबारी ले आए। महंत ने संसार की निन्दा शुरू कर दी और दुनिया को स्वार्थी कहने लगे। ईश्वर की महिमा का गुणगान करने लगे। महंत ने हरिहर काका को समझाया कि अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम कर दें, इससे तुम्हें बैकुंठ की प्राप्ति होगी तथा लोग तुम्हें हमेशा याद करेंगे। हरिहर काका उनकी बातें ध्यान से सुनते रहे और दुविधा में पड़ गए। अब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। महंत ने ठाकुरबारी में ही उनके रहने और खाने-पीने का इंतजाम करवा दिया था।

जैसे ही इस घटना की सूचना उनके भाइयों को मिली वैसे ही उन्हें मनाने के लिए ठाकुरबारी पहुँच गए। पर वे उन्हें घर वापिस लाने में सफल न हो सके। अगले ही दिन उनके भाई फिर हरिहर काका के पास गए और उनके पांव पकड़कर रोने लगे। हरिहर काका का दिल पसीज गया और वह अपने भाइयों के साथ घर वापिस आ गए। अब हरिहर काका की खूब सेवा होने लगी, जिस वस्तु की उन्हें इच्छा होती, आवाज़ लगाते ही तुरंत मिल जाती। परन्तु ऐसा केवल कुछ समय तक ही चल पाया।

हरिहर काका का अपहरण

Harihar Kaka Class 10 Summary: गाँव में हरिहर काका की चर्चा होने लगी। काका के भाई उनकी जमीन अपने नाम लिखवाना चाहते थे। लेकिन हरिहर काका के सामने ऐसे कई उदहारण थे, जिन्होंने अपने जीते जी जमीन परिवार के नाम कर दी और बाद में पछताते रहे। महंत इसका उपाय सोचने लगे। एक दिन महंत ने योजना बनाकर काका का अपहरण करवा दिया। हरिहर काका के भाइयों और गाँवों के लोगों को जब खबर लगी, तब सभी ठाकुरबारी जा पहुँचे। उन्होंने पुलिस को बुला लिया। मंदिर के अंदर महंत एवं उसके आदमियों ने काका से ज़बरदस्ती कागजों पर अंगूठे के निशान ले लिए। पुलिस ने बहुत मुश्किल से मंदिर के दरवाजे का ताला तोड़कर देखा, तो काका रस्सियों से बंधे मिले। उनके भाई उन्हें घर ले गए और उनका बहुत ध्यान रखने लगे।

हरिहर काका का घर छोड़ना

Harihar Kaka Class 10 Summary: कुछ दिनों बाद उन पर फिर भी दवाब डाला जाने लगा कि वे अपनी जमीन अपने भाइयों के नाम कर दें। हरिहर काका के भाइयों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया कि सीधे तरीके से तुम हमारे नाम जमीन कर दो, नहीं तो मार कर यहीं घर में गाढ़ देंगे और गाँवों वालों को पता भी नहीं चलेगा। हरिहर काका के इनकार करने पर उनके भाइयों ने उन्हें मरना-पीटना शुरू कर दिया।

काका अपनी मदद के लिए चिल्लाने लगे और काका की आवाज़ सुनकर सभी गाँव वाले इकट्ठा हो गए। महंत को खबर लगते ही वह पुलिस लेकर वहाँ आ पहुँचा। पुलिस ने काका को मुक्त करवाकर उनका बयान लिया। काका ने बताया कि मेरे भाइयों ने ज़बरदस्ती कागज़ों पर मेरे अंगूठे के निशान लिए हैं। काका ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की। अब हरिहर काका घर से अलग अपना जीवन बीता रहे हैं। उन्होंने अपनी सेवा के लिए एक नौकर भी रख लिया और पुलिसकर्मी भी उन्हें सुरक्षा दे रहे हैं और उनके ही पैसों पर मौज कर रहे हैं।

हरिहर काका का मौन रूप धारण करना

Harihar Kaka Class 10 Summary: एक दिन हरिहर काका के सामने नेताजी ने प्रस्ताव रखा कि वह अपनी जमीन पर ‘हरिहर उच्च विद्यालय’ खोल दें पर काका ने साफ इनकार कर दिया। अब गाँव के सभी लोग सोचते हैं कि काका की मृत्यु के बाद महंत साधुओं- संत को बुलाकर जमीन पर कब्जा कर लेगा। अब हरिहर काका मौन होकर अपनी जिंदगी काट रहे हैं। काका गूंगेपन का शिकार हो गए हैं। कोई बात कहो, कुछ पूछो, कोई जवाब नहीं। खुली आँखों से बराबर आकाश को निहारा करते हैं। सारे गाँव के लोग उनके बारे में बहुत कुछ कहते-सुनते हैं, लेकिन उनके पास अब कहने के लिए कोई बात नहीं।

हरिहर काका कहानी का उद्देश्य – Class 10 Hindi Harihar Kaka Lesson

हरिहर काका कहानी का उद्देश्य समाज की स्वार्थलोलुपता को हमारे सामने लाना है और स्वार्थी लोगों से सचेत करना है, ताकि ऐसे लोगों से हम खुद को बचा सकें। अब हमारे समाज में रिश्तों के अर्थ बदल गए हैं, पैसों के लालच में लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन गए है। समाज में रिश्तों की अहमियत कम हो गई है, अब लोग सिर्फ अपने मतलब तक ही रिश्ता रखते है। हरिहर काका कहानी से लेखक हमें यह शिक्षा देना चाहते हैं कि ऐसे स्वार्थी लोगों से हमें बच कर रहना चाहिए।

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