Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9 Summary

Aadmi Naama – Najir Akbarabaadi (आदमी नामा- नाजिर अकबराबादी)

नाजिर अकबराबादी का जीवन परिचय- Nazeer Akbarabadi Ka Jivan Parichay : नज़ीर अकबराबादी 18वीं सदी के प्रसिद्ध भारतीय शायर थे। इन्हें “नज़्म का पिता” कहा जाता है। इन्होंने कई ग़ज़लें लिखी, इनकी सबसे प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक ग़ज़ल बंजारानामा है। ऐसा माना जाता है कि नज़ीर अकबराबादी का जन्म दिल्ली शहर में सन 1735 में हुआ था। युवा अवस्था में वे दिल्ली से आगरा चले गए और आगरा में ही उन्होंने अरबी और फारसी भाषा में तालीम हासिल की। नज़ीर आम लोगों के कवि थे। इन्होंने आम जीवन, ऋतुओं, त्योहारों, फलों, सब्जियों आदि विषयों पर लिखा। नजीर धर्म-निरपेक्षता के ज्वलंत उदाहरण हैं। कहा जाता है कि उन्होंने लगभग दो लाख रचनाएं लिखीं, परन्तु अब उनकी सिर्फ छह हज़ार के करीब ही रचनाएं हमारे बीच बची हैं और इन में से 600 के करीब ग़ज़लें हैं।

समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी को नज़ीर साहब ने अपनी कविता में बड़ी ही सरलता से पेश किया है। नज़ीर साहब को आम जनता की शायरी करने के कारण उपेक्षित किया जाता रहा। ककड़ी, जलेबी और तिल के लड्डू जैसी आम चीजों पर लिखी गई कविताओं को आलोचक कविता मानने से इनकार करते रहे। बाद में नज़ीर साहब की ‘उत्कृष्ट शायरी’ को पहचाना गया और आज उन्हें उर्दू साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक माना जाता है। लगभग सौ वर्ष की आयु पाने पर भी इस शायर को जीते जी उतनी ख्याति नहीं प्राप्त हुई, जितनी कि उन्हें आज मिल रही है।

भाषा के क्षेत्र में भी उनकी अच्छी पकड़ थी, उन्होंने अपनी शायरी में जन-संस्कृति का, जिसमें हिन्दू संस्कृति भी शामिल है, दिग्दर्शन कराया है और बड़ी सहजता से अपने काव्यों में हिन्दी के शब्दों का उपयोग किया है। उनकी शैली सीधी असर डालने वाली है और अलंकारों से मुक्त है। इसीलिए वे बहुत लोकप्रिय भी हुए।

आदमी नामा कविता का अर्थ- Aadmi Nama Poem Explanation : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि नज़ीर अकबराबादी ने आदमी के विभन्न रूपों का वर्णन किया है। उनके अनुसार इस संसार में हर तरह के आदमी बसे हुए हैं, फिर चाहे वो अच्छे हों या ख़राब। उनके अनुसार इन्हीं आदमियों में से कोई ऐसा है, जो दूसरों का भला चाहता है, उनकी सहायता करता है, अगर कोई मदद के लिए पुकारे, तो भाग कर जाता है। इसके ठीक विपरीत कुछ आदमी ऐसे भी हैं, जिनके मन में पाप भरा हुआ है, वे दूसरों से नफरत करते हैं।  दूसरों की चीज़ें चुराते हैं। दूसरों की इज़्ज़त से खिलवाड़ करने में उन्हें मज़ा आता है। इस प्रकार उनका यह कथन पूरी तरह से सत्य है कि इस दुनिया में बुरे तथा भले दोनों किस्म के इंसान हैं।

Aadmi Nama Class 9 – आदमी नामा

(1)
दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी
और मुफ़लिश-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी
ज़रदार बेनवा है सो है वो भी आदमी
निअमत जो खा रहा है सो है वो भी आदमी
टुकड़े चबा रहा है सो है वो भी आदमी

(2)
मसज़िद भी आदमी ने बनाई है यां मियाँ
बनते हैं आदमी ही इमाम और खुतबाख्वाँ
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी

(3)
यां आदमी पै जान को वारे है आदमी
और आदमी पै तेग को मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी

(4)
अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर
यां आदमी मुरीद है और आदमी ही पीर
अच्छा भी आदमी ही कहाता है ए नज़ीर
और सबमें जो बुरा है सो है वो भी आदमी

Aadmi Nama Class 9 Summary in Hindi – आदमी नामा भावार्थ

दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी
और मुफ़लिश-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी
ज़रदार बेनवा है सो है वो भी आदमी
निअमत जो खा रहा है सो है वो भी आदमी
टुकड़े चबा रहा है सो है वो भी आदमी
आदमी नामा भावार्थ :  आदमी नामा कविता में कवि नज़ीर अकबराबादी ने मानव के विविध रूपों के बारे में बताया है। उन्होंने आदमी के हर रूप का वर्णन किया है। दुनिया में विभिन्न प्रकार के आदमी होते हैं, जैसे कुछ धनी व्यक्ति होते हैं, तो कुछ गरीब भी होते हैं। कुछ बुद्धिमान व्यक्ति होते हैं, तो कुछ मुर्ख भी होते हैं। यहां कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन खाने वाले व्यक्ति हैं, तो झूठे तथा रूखे-सूखे टुकड़ों को खाकर पलने वाले आदमी भी यहीं मौजूद है।

हर आदमी अलग होता है और उसका अपना अलग काम होता है। इसी कारणवश उनकी जीवन-शैली भी अलग होती है। उनके रहने का तरीका, खान-पान सब कुछ अलग होता है। उनकी जिमेदारियां भी अलग-अलग होती हैं।

इसीलिए कवि अपनी इस कविता में कहता है कि चाहे राजा हो या प्रजा, सब आदमी ही हैं। चाहे ताक़तवर हो या कमजोर, सब आदमी ही हैं।

मसज़िद भी आदमी ने बनाई है यां मियाँ
बनते हैं आदमी ही इमाम और खुतबाख्वाँ
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी
आदमी नामा भावार्थ : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने आदमी के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए, उनके कार्यों के बारे में बताया है। उन्होंने यहाँ हमें मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा है कि जिन्होंने मस्जिद का निर्माण किया है, वे भी आदमी हैं। जो मस्जिद के अंदर नमाज़ या कुरान पढ़ाता है, वह भी आदमी है और जो लोग उस नमाज़ या कुरान को पढ़ने जाते हैं, वे भी आदमी हैं।

यहाँ तक कि उनकी चप्पलों को चुराने वाले भी आदमी एवं उनके ऊपर नजर रखकर पहरा देने वाले भी आदमी ही हैं। इस तरह कवि ने यहाँ आदमी के विभिन्न रूपों एवं कार्यो का वर्णन करते हुए, हमें यह बताया है कि दुनिया में पुण्य करने वाले भी आदमी और पाप करने वाले भी आदमी ही हैं।

यां आदमी पै जान को वारे है आदमी
और आदमी पै तेग को मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी
आदमी नामा भावार्थ : अपनी इन पंक्तियों में कवि ने आदमी के प्रकृति के बारे में बताया है। कोई आदमी दूसरे आदमी की जान ले लेता है, तो कोई आदमी उसकी जान बचाता है। कोई आदमी किसी को बेइज्जत करता है, तो कोई आदमी उसकी इज्जत बचाने की कोशिश करता है। मदद मांगने के लिए जो पुकार लगता है, वह भी आदमी है और जो वह पुकार सुनकर मदद करने के लिए दौड़ता है, वह भी आदमी ही है। इस तरह कवि ने हमें यह शिक्षा दी है कि मनुष्य विभिन्न प्रकृति के होते हैं। कोई भला करके खुश होता है, तो कोई बुरा करके।

अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर
यां आदमी मुरीद है और आदमी ही पीर
अच्छा भी आदमी ही कहाता है ए नज़ीर
और सबमें जो बुरा है सो है वो भी आदमी
आदमी नामा भावार्थ :  इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि शरीफ भी आदमी है और कमीने भी आदमी। जो शाह बनकर गद्दी पे बैठा है, वह भी आदमी और जो उसका वजीर है, वह भी आदमी ही है। किसी को खुश करने के लिए कुछ भी कर देने वाला भी आदमी ही है और उससे खुश होने वाला भी आदमी। किसी को तकलीफ देने वाला भी आदमी और तकलीफ सहने वाला भी आदमी ही है। इस तरह नाजिर अकबराबादी के इस आदमी नामा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि इस संसार में जो अच्छा करता है, वह भी आदमी है और जो बुरा करता है, वह भी आदमी ही है।

Class IX Sparsh भाग 1: Hindi Sparsh Class 9 Chapters Summary

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